राजस्थान की प्रमुख वेशभूषा : पुरुषों के वस्त्र एवं पगड़ियां

अगर आप RAS , REET , 1ST / 2ND GRADE TEACHER , RAJ. POLICE , LDC या राजस्थान से संबंधित अन्य किसी भी परीक्षा की तैयारी करते हैं और आपके सिलेबस में Rajasthan Art and Culture विषय है तो इसमें आपको राजस्थान की प्रमुख वेशभूषा एवं आभूषण के बारे में पढ़ने के लिए मिलेगा हम इस पोस्ट में आपको राजस्थान की प्रमुख वेशभूषा : पुरुषों के वस्त्र एवं पगड़ियां से संबंधित नोट्स उपलब्ध करवा रहे है

राजस्थान में पुरुषों द्वारा सबसे प्रचलित पगड़ी है जिसे सिर पर पहना जाता है हम उसके बारे में विस्तार से इस पोस्ट में पढ़ने वाले हैं

पुरुषों के वस्त्र एवं पगड़ियों के बारे में जाने

पगड़ियाँ


– पगड़ी पुरुषों द्वारा सिर पर बाँधी जाती है। जो मान-सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक होती है।
– राज्य में पगड़ियों का संग्रहालय – बागोर की हवेली (उदयपुर)
– इस संग्रहालय में विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी सुरक्षित है।
– उपनाम – पाग, घुमालो, पेटा, लपेटो, बागा, साफा, पेचा, अमलो, फालियो, सेलो, शिरोप्राण।
– मेवाड़ की पगड़ी और मारवाड़ का साफा प्रसिद्ध हैं।
– मेवाड़ की उदयशाही पगड़ी तथा जोधपुरी साफा कशीदाकारी के लिए प्रसिद्ध हैं।
– जयपुर की झाड़शाही/राजाशाही पगड़ी प्रसिद्ध है।
– पाग – पाग, उस पगड़ी को कहते हैं जो लम्बाई में सर्वाधिक होती है।
– पेचा – जरीदार पगड़ी को पेचा कहा जाता है, पेचा में केवल एक ही रंग होता है यदि बहुरंग हो तो उसे मंदील कहा जाता है।
– पगड़ी के सजावट की वस्तुएँ  तुर्र, सरपंच, बालाबन्दी, धुगधुगी, पछेवड़ी, लटकन, फतेपेच आदि का इस्तेमाल होता था।


1. अमरशाही पगड़ी – महाराणा अमरसिंह-I
2. अरसी शाही पगड़ी – महाराणा अखैसिंह 
3. उदयशाही पगड़ी – महाराणा उदयसिंह
4. स्वरूपशाही पगड़ी – महाराणा स्वरूपसिंह
5. भीमशाही पगड़ी – महाराणा भीमसिंह
6. बरखारमा पगड़ी – मेवाड़ की सर्वाधिक प्रचलित पगड़ी।

मारवाड़ की प्रचलित पगड़ियाँ (साफा)


1. जसवन्तशाही साफा – महाराजा जसवन्तसिंह-I
2. सरदारशाही साफा – महाराजा सरदारसिंह
3. उम्मेदशाही साफा – महाराजा उम्मेदसिंह
4. गजशाही साफा – महाराजा गजसिंह

विशेष अवसर की पगड़ियाँ


लहरिया पगड़ी – तीज के त्योहार पर पहने जाने वाली पगड़ी।
मंदील पगड़ी – दशहरे के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी। 
मोठडे़ की पगड़ी – विवाह/उत्सव के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी।
मोटी पट्‌टेदार पगड़ी – बनजारे लोग मोटी पट्टेदार पगड़ी पहनते हैं।
आंटे वाली पगड़ी – सुनार आंटे वाले पगड़ी पहनते हैं।


– बसन्त ऋतु – गुलाबी पगड़ी
– ग्रीष्म ऋतु – फूल गुलाबी व बहरीया पगड़ी­
– वर्षा ऋतु – मलय गिरी पगड़ी
– शरद ऋतु – गुल-ए-अनार पगड़ी
– हेमन्त ऋतु – मोलिया पगड़ी
– शिशिर ऋतु – केसरिया पगड़ी
– होली के अवसर पर – फूल-पत्ती की छपाई वाली पगड़ी
– मेवाड़ के महाराणाओं की पगड़ी बाँधने वाले व्यक्ति को छाबदार कहा जाता है।
– अकबर के काल में मेवाड़ में ईरानी पद्धति की अटपटी पगड़ी का प्रचलन था।
– जोधपुर में चूंदड़ी का साफा सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है।
– जोधपुर/मारवाड़ में खिड़किया पाग सर्वाधिक प्रसिद्ध रही है लेकिन वर्तमान में इस पाग का प्रयोग गणगौर पर ईसरजी के लिए किया जाता है।
– मारवाड़ की प्रमुख पगड़ियाँ – जसवन्तशाही, चूंडावत शाही, शाहजहाँनी, मांडपशाही, मानशाही, राठौड़ी, विजय शाही आदि।
– रोबिला साफा – मारवाड़ का प्रसिद्ध है।
– जोधपुरी साफा – इसका प्रचलन जसवन्तसिंह-I के काल में हुआ।
– सर प्रतापसिंह ने जोधपुरी साफा को देश-विदेश में विशेष पहचान दिलाई।
– राठौड़ी पेंच – राजस्थान में राजपूतों द्वारा सर्वाधिक पसंद की जाने वाली पगड़ी।
– राजस्थानी लोकगीत “जला” में इस पगड़ी का उल्लेख मिलता है।
– राजशाही पगड़ी या झाड़शाही पगड़ी या जयपुरी पगड़ी – जयपुर में प्रचलित।
– यह पगड़ी लाल रंग के लहरिये से बनी होती है जो केवल राजाओं के द्वारा पहनी जाती थी।


– जामा – यह वस्त्र गर्दन से लेकर घुटनों तक पहना जाता है।
– मुगलकाल में जामा गर्दन से लेकर पैरों के टखने तक पहना जाता था इसे ‘अकबरी जामा’ कहा जाता था।
– पछेवड़ा – पुरुषों के द्वारा सर्दी में ओढ़ा जाने वाला चद्दरनुमा वस्त्र।
– डौछी – यह जामा वस्त्र की तरह पहना जाता है, सर्वाधिक मेवाड़ में प्रचलित है।
– अंगोछा – पुरुषों के कन्धे पर रखा जाने वाला वस्त्र।
– पायजामा – कमर से लेकर पैरों के टखने तक पहने जाने वाला वस्त्र।
– आतमसुख – यह सर्दियों में पहना जाने वाला वस्त्र।
– घूघी – ऊनी वस्त्र जो सर्दी से बचाव हेतु उपयोग लिया जाता है।
– अंगरखा या अंगरखी या बुगतरी – यह शरीर के ऊपरी भाग पर पहने जाने वाला वस्त्र है।
– अचकन – यह अंगरखी का विकसित रूप है।
– चुगा या चौगा – यह अंगरखी के ऊपर पहना जाने वाला वस्त्र।
– कमरबन्द या पटका – यह चौगा को कमर से बाँधने वाला वस्त्र जिसमें कटार या तलवार रखी जाती थी।
– धोती – यह सफेद रंग का वस्त्र है जो पुरुष कमर पर पहनते है।
– बिरजस या ब्रिचेस – चूड़ीदार पायजामे के स्थान पर प्रयोग किया जाने वाला वस्त्र।

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अंतिम शब्द 

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